नीतेश वर्मा
ब्यूरो हेड
रायपुर,
प्रदेश में अब 5 डिसमिल से उपर की कृषि भूमि की अवैध रजिस्ट्री पर रोक लगेगी। वहीं अवैध प्लाटिंग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने विधानसभा में घोषणा करते हुए कहा कि 5 डिसमिल से उपर की कृषि भूमि की रेरा या टाउन प्लानिंग से अनुमति लिए बिना ही प्लाट काटने और बेचने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। ऐसे मामलों में रजिस्ट्री प्रतिबंधित करने के लिए एक माह के भीतर नए नियम लागू किए जाएंगे। इन नियमों को केबिनेट में भी मंजूरी के लिए लाएंगे। वहीं आवश्यक हुआ तो विधानसभा में भी लाया जाएगा।
वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने सदन में घोषणा करते हुए कहा कि अब नए नियमों के तहत रेरा की अनुमति या टाउन प्लानिंग की प्रक्रिया के बिना बनाई गई अवैध रजिस्ट्री प्रतिबंधित कर किया जाएगा। पहले लैंड रेवेन्यू कोर्ट नियम बनाएंगे
कॉलोनियों की रजिस्ट्री को प्रतिबंधित में 5 डिसमिल से छोटी रजिस्ट्री के मामलों में नामांतरण का प्रावधान था, लेकिन पिछली सरकार ने इसे समाप्त कर दिया, जिससे अवैध प्लाटिंग का सिलसिला बढ़ गया। केबिनेट में इसे एक माह के भीतर ले आएंगे
विधानसभा में अवैध प्लाटिंग का मुद्दा जोर-शोर से गूंजा। ध्यानाकर्षण सूचना के जरिए सत्तापक्ष के सदस्य अनुज शर्मा ने धरसींवा क्षेत्र में अवैध प्लाटिंग को लेकर सवाल उठाए। वहीं विधानसभा के समीप के गांवों में भी अवैध प्लाटिंग के मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। इस मामले में सत्तापक्ष के सदस्यों ने भी सहमति जताई। राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि धरसींवा क्षेत्र में अवैध प्लाटिंग की शिकायतें मिली है। यह पूरे प्रदेश की समस्या है। उन्होंने कहा कि रजिस्ट्री का काम पंजीयन विभाग करता है, डायवर्सन टीएनसी से होता है। इसमें एक संयुक्त समिति गठित करने की जरूरत है। जिसमें राजस्व, नगर निवेश, पंजीयन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास एवं नगरीय प्रशासन विभाग की टीम होनी चाहिए। राजस्व विभाग अकेले अवैध प्लाटिंग को नहीं रोक सकता। एक संयुक्त टीम गठित कर नियम बनाना पड़ेगा। भाजपा सदस्य राजेश मूणत ने कहा कि पूर्व रमन सरकार के दौरान अवैध प्लाटिंग पर रोक लगाई गई थी। पूर्व सरकार में जितनी अवैध प्लाटिंग हुई उसका हर्जाना भुगत रहे हैं। समस्या का स्थाई समाधान चाहते हैं तो पांच डिसमिल से उपर की रजिस्ट्री पर रोक लगाना चाहिए। हजारों लोग बिना वैध लेआउट या अनुमति के कृषि भूमि खरीद चुके हैं, जिससे उन्हें बिजली,पानी, या नक्शा पास जैसी सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं। ऐसे मामलों में अवैध प्लाटिंग करने वाले लोग बड़ी रकम कमा लेते हैं, लेकिन खरीददार जीवनभर समस्याओं का सामना करते हैं।