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खास चीजो से बनी ये खास राखिया

This special ash made from special things

धान, चांवल, गेंहू और लौकी के बीज से बनी राखियां इस बार सजेगी भाईयों के कलाई में
कवर्धा……. भाई-बहनों का पवित्र रक्षाबंधन का त्यौहार अगले महीने 3 अगस्त को मनाया जाएगा। देश में बढ़ते कोविड-19 कोराना वायरस के संक्रमण के रोकथाम और इसके संक्रमण से बचाव को विशेष ध्यान रखते हुए कबीरधाम जिले के बिहान महिला स्व सहायता समूहों द्वारा धान, चांवल, गेंहू और लौकी के बीज से बनी स्वदेशी आकर्षक राखियां तैयार की गई हैं। सभी वर्गो को ध्यान में रखते हुए आकर्षक राखियों के दाम 10 रूपए से लेकर अधिकत 40 रूपए तक रखी गई है। राखियों के आकर्षक पैकेट भी तैयार की गई है। इस पैकेट में कोरोना वायरस के बचाव को ध्यान में रखते हुए भाईयों के लिए राखी के साथ-साथ हैण्ड सेनेटाईजर, मास्क, रूमाल, पीला चांवल और मुंह मीठा करने के लिए चॉकलेट का भी पैकेजिंग की गई है। इसका मूल्य 110 से 150 रूपए तक रखी गई है। कबीरधाम जिले के बोड़ला, पंडरिया, सहसपुर लोहारा और कवर्धा विकासखंड बिहान के 6 से अधिक महिला स्व सहायता समूहों द्वारा तैयार की गई स्वदेशी राखी की मांग बढ़ती जा रही है। अतिरिक्त आमदानी करने के लिए यह बेहतर और अच्छा अवसर है। कोविड-19 के रोकथाम के लिए देश में लॉकडाउन जारी रहा। इसी वजह से बड़ी-बड़ी कम्पनियों से आने वाली राखियां मांग के अनुरूप छोटे-छोटे शहरों, कस्बों में नहीं पहुंच पाई। ऐसी परिस्थिति में बिहान के महिला समूहों द्वारा तैयार की गई राखियां भइयों के कलाई में सजेगी।
बोड़ला विकासखंड की जय गंगा मैया महिला स्व सहायता समूह राजानवागांव, आंचल महिला स्व सहायता समूह, पोडी, पंडरिया के वैष्णव देवी महिला स्व सहायता समूह पेण्ड्री खुर्द, लक्ष्मी महिला स्व सहायता समूह ग्राम मैनपुरा के साथ ही कवर्धा और सहसपुर लोहारा के महिला स्व सहायता समूहों द्वारा रक्षाबंधन को ध्यान में रखते हुए बड़ी मात्रा में स्वदेशी राखियां तैयार की गई है। शासन के मंशानुसार जिला प्रशासन द्वारा जिले की महिला समूहों को आर्थिक रूप से मजबूत और उनके आय के स्त्रोत बढ़ाने के लिए सभी त्यौहारों में प्रचलित और आवश्यक सामाग्रियों की उपलब्धता बनाए रखने के लिए अलग-अलग सीजन पर अलग-अलग सामाग्रियां तैयार की गई है। समूहों द्वारा इससे पहले होली पर्व पर हर्बल गुलाल तैयार किया गया था। समूहों ने डेढ़ लाख रूपए से अधिक हर्बल गुलाल बेंचकर आय का एक नया स्त्रोत तैयार किए है।महिला समूह की अध्यक्ष श्रीमती सरोजनी कश्यप बताया कि कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए महिला स्व सहायता समूहों के सदस्यों ने बेहतर काम किया है। इस संकट की घड़ी में बड़ी संख्या में मास्क तैयार कर रोजगार के साथ-साथ अतिरिक्त आमदनी का सृजन किया गया है। उन्होंने बताया कि इस बार चाइना से आने वाली राखियां देश के शहरों और कस्बों तक नहीं पहुंच पाई है। राखी पर्व पर बाजार की मांग को ध्यान रखते हुए बिहान की विभिन्न महिला स्व सहायता समूहों द्वारा धान, चांवल, गेंहू और लौकी के बीज से बनी स्वदेशी आकर्षक राखियां तैयार की गई है।

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