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CM भूपेश बघेल जन्मदिन: गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ का सूत्रवाक्य देने वाले मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 32 साल में बने विधायक, दिया ‘गढ़बो नवा छत्तीसगढ़’ का मंत्र

32 साल की उम्र में वे अविभाजित मध्यप्रदेश में पहली बार विधायक बने थे. 17 दिसंबर 2018 को उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी.

रायपुर: छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का जन्मदिन (CM Bhupesh Baghel ) 23 अगस्त को है. मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ का सूत्रवाक्य देने वाले मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के जन्मदिन से पहले उनके सियासी सफर पर आइए एक नजर डालते हैं. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का जन्म 23 अगस्त 1961 को दुर्ग जिले के बेलौदी गांव में हुआ. रायपुर के साइंस कॉलेज से उन्होंने स्नातक की पढ़ाई की. भूपेश बघेल की मां का नाम स्वर्गीय बिंदेश्वरी बघेल और पिता नंदकुमार बघेल है. भूपेश बघेल ने जमीनी स्तर से राजनीति के सफर की शुरुआत की. 1990 में वे दुर्ग जिला युवक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बने. फिर 1992 में बाबरी मस्जिद ढहाए जाने पर 350 किलोमीटर की सद्भावना यात्रा निकाली.

1994 में मध्यप्रदेश युवक कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष बने. 32 साल की उम्र में वे अविभाजित मध्यप्रदेश में पहली बार विधायक बने. 1993 में पहली बार पाटन विधानसभा से जीतकर विधायक बने. फिर 1998 में दूसरी बार भी पाटन से निर्वाचित हुए. 2003 में तीसरी बार, 2013 में चौथी बार और 2018 में पांचवीं बार पाटन से चुनाव जीते. वे मध्यप्रदेश के परिवहन मंत्री और परिवहन निगम के अध्यक्ष भी बने. 2003 से 2018 तक लगातार वे सशक्त विपक्ष की भूमिका में रहे और 2003 से 2008 के बीच वे विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष भी रहे.

17 दिसंबर को ली मुख्यमंत्री पद की शपथ

2013 में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली. गुटबाजी में उलझी कांग्रेस को ना केवल उन्होंने साधा बल्कि कांग्रेस की सत्ता की आस में फांस लगाने वालों को भी पार्टी के बाहर का रास्ता दिखाया. नतीजा ये रहा कि पिछले 15 सालों से सत्ता का वनवास भोग रही कांग्रेस को 2018 विधानसभा चुनाव में छप्पर फाड़कर सीटें मिलीं. पहले साल जहां छत्तीसगढ़ के चार चिन्हारी, नरवा, गरूवा, घुरवा, बारी के नारे को उन्होंने घर –घर पहुंचाया. वहीं छत्तीसगढ़ की संस्कृति और अस्मिता की अलख घर-घर पहुंचाई.

किसी के लिए कका तो किसी के लिए दाऊ, बहनों के लिए भाई तो वहीं किसी के लिए जिम्मेदार बेटे भूपेश बघेल छत्तीसगढ़ कांग्रेस का वो चेहरा बन गए कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के ये उन चेहरों में शामिल हो गए जिनकी कर्मठता और राजनीति पर पार्टी सबसे ज्यादा भरोसा करती है. 17 दिसंबर 2018 को उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और शपथ लेने के साथ ही उन्होंने ताबड़तोड़ प्रमुख वादे पूरे किए.

शपथ लेने के डेढ़ घंटे बाद किए थे बड़े ऐलान

शपथ के डेढ़ घंटे बाद ही 16.65 लाख किसानों की कर्जमाफी के आदेश दिए. साथ ही किसानों से 2500 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से धान खरीदी का फैसला किया. फिर चाहे वो बस्तर के लोहांडीगुड़ा में आदिवासियों की जमीन लौटाने का मामला हो या फिर छोटे भूखंडों की खरीदी-बिक्री पर लगी रोक हटाने का. स्कूल-कॉलेज में सहायक शिक्षक और प्रोफेसर की नियुक्ति का, उनके फैसलों से प्रदेश के हर वर्ग के लोगों को लाभ मिला. झीरम कांड, नान घोटाले की जांच के लिए एसआईटी गठित करने के साथ ही पत्रकारों की सुरक्षा के लिए कानून बनाने का ऐलान भी उन्होंने किया. वहीं प्रदेश की संस्कृति और कला के साथ लोक त्यौहारों पर छुट्टी की सौगात दी. हरेली, तीज, करमा जयंती और छठ त्यौहार की छुट्टी दी गई. बिहार के बाद सिर्फ छत्तीसगढ़ ही ऐसा प्रदेश है, जहां पर छठ पर छुट्टी दी गई है.

कोरोना की पहली लहर में जहां देश के कई राज्य भयावह संक्रमण,बेरोजगारी ,मजदूरों की दुर्दशा से घिरे थे, ऐसे समय में छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल की सुझबूझ और तत्काल लिए गए निर्णयों और इंतजामों ने छत्तीसगढ़ को ना केवल संक्रमण से बचाया बल्कि बेहतर प्रबंधन वालें राज्य में भी शुमार किया. कोरोना की दूसरी लहर में छत्तीसगढ़ के भिलाई स्टील प्लांट से ऑक्सीजन की सप्लाई ने कई राज्यों के मरीजों की जान बचाई. 14 हजार 580 पदों पर सीधी भर्ती पर नियुक्ति के आदेश के साथ ही बिजली विभाग में 1500 पदों की भर्ती के साथ हीं अन्य कई भर्तियों की सौगात दी.

छत्तीसगढ़ के बच्चों से लेकर बड़ों तक में लोकप्रियता का शिखर सीएम भूपेश बघेल छू रहे हैं. विपक्ष के रूप में भी उन्होंने अपनी जो उपस्थिति दर्ज कराई वो देश में चर्चा का विषय रहता है.

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