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माओवाद के काले अंधेरे से ग्रामीणों को आजादी दिलाने के लिए सुकमा पुलिस का “पूना नर्कोम” अभियान शुरू , मिलेगी आजादी की “नई सुबह”, रोजगार हेतु पुलिस देगी ट्रेनिंग, अब तक 2500 से ज्यादा युवाओं ने करवाया रजिस्ट्रेशन

युवाओं को रोजगार देने से लेकर नक्सलवाद के खात्मे तक पुलिस अब नई रणनीति के तहत काम कर रही हैपूना नर्कोम" क्षेत्रीय बोली गोंडी का शब्द है, जिसका हिंदी अनुवाद "नई सुबह" है।

माओवाद के काले अंधेरे से ग्रामीणों को आजादी दिलाने के लिए सुकमा पुलिस इन दिनों “पूना नर्कोम” अभियान चला रही है। “पूना नर्कोम” क्षेत्रीय बोली गोंडी का शब्द है, जिसका हिंदी अनुवाद “नई सुबह” है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य नक्सल इलाके में सुरक्षा और विकास का है। युवाओं को रोजगार देने से लेकर नक्सलवाद के खात्मे तक पुलिस अब नई रणनीति के तहत काम कर रही है। वहीं बस्तर संभाग का सुकमा एक ऐसा जिला है, जहां नक्सली ग्रामीणों की आड़ में फोर्स को ज्यादा नुकसान पहुंचाते आए हैं। हालांकि अब पुलिस का दावा है कि सुकमा जिले में जल्द ही नक्सलवाद से आजादी की “नई सुबह” आएगी। इस अभियान के तहत अब तक 2500 से ज्यादा युवाओं ने ट्रेनिंग लेने रजिस्ट्रेशन कराया है।

सुकमा पुलिस इन दिनों “पूना नर्कोम” अभियान चला रही है। – Dainik Bhaskar

सुकमा पुलिस इन दिनों “पूना नर्कोम” अभियान चला रही है।

 

माओवाद के काले अंधेरे से ग्रामीणों को आजादी दिलाने के लिए सुकमा पुलिस इन दिनों “पूना नर्कोम” अभियान चला रही है। “पूना नर्कोम” क्षेत्रीय बोली गोंडी का शब्द है, जिसका हिंदी अनुवाद “नई सुबह” है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य नक्सल इलाके में सुरक्षा और विकास का है। कुछ दिन पहले कुंदेड़ के ग्रामीणों ने सड़क व सुरक्षा की मांग की थी।

9 अगस्त से हुई इस अभियान की शुरुआत

9 अगस्त विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर सुकमा के SP सुनील शर्मा ने इस अभियान की शुरुआत की थी। अभियान के शुरुआत करते ही अंदरूनी इलाके के ग्रामीणों का भी पुलिस को भरपूर सहयोग मिला। इस अभियान में पुलिस अपने हर कार्यक्रम में ग्रामीणों को साथ लेकर चल रही है। विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर जिले के 14 अलग-अलग जगह पर ग्रामीण इकठ्ठा हुए थे, जिन्होंने पुलिस के साथ मिलकर एक कार्यक्रम किया था। SP ने बताया कि, अब ग्रामीण खुद चाहते हैं कि क्षेत्र का विकास हो। उन्हें सारी सुविधा मिले जिसके वे हकदार हैं।

“पूना नर्कोम” अभियान के तहत पुलिस जिले के नक्सल प्रभावित इलाके के युवाओं को तरह-तरह के रोजगार के लिए प्रशिक्षण भी देगी। जिसमें आर्मी, पुलिस में भर्ती होने के लिए फिजिकल ट्रेनिंग के साथ किताबी ज्ञान भी दिया जाएगा। साथ ही बैंकिंग व रेलवे में भर्ती के लिए भी पुलिस युवाओं को मुफ्त में प्रशिक्षण देगी। जैसे ही इसकी जानकारी क्षेत्र के लोगों को लगी तो मिनपा, जगरगुंडा, चिंगावराम जैसे सबसे संवेदनशील इलाके के लगभग 2500 से ज्यादा युवाओं ने सुकमा जिला मुख्यालय पहुंचकर रजिस्ट्रेशन करवाया है।

1 साल तक चलेगा अभियान, हर 3 महीने में लेंगे फीडबैक

सुकमा पुलिस का “पूना नर्कोम” अभियान फिलहाल 1 साल तक ही चलाया जाएगा। साथ ही इस अभियान का हर 3 महीने में फीडबैक भी लिया जाएगा। जिसमें देखा जाएगा की इस अभियान का हर महीने कितना असर पड़ रहा है। नक्सल इलाके में किस तरह से काम हो रहा और वहां के ग्रामीणों का जीवन कैसा है। साथ ही पुलिस इस अभियान के तहत ग्रामीणों के मन में विश्वास जितने का भी प्रयास कर रही है। SP ने कहा कि इस अभियान से जल्द ही सुकमा जिले की तस्वीर बदलेगी।

ग्रामीण पहुंचे पुलिस के पास,कहा- नहीं देंगे नक्सलियों का साथ

पूना नर्कोम अभियान के अभी एक महीने भी नहीं हुए हैं और इसका असर देखने को मिल रहा है। हाल ही के 2 दिन पहले इसी अभियान से प्रभावित होकर नगाराम गांव के 100 से ज्यादा ग्रामीण पुलिस के सामने पहुंचे, जिन्होंने साफ तौर पर कहा है कि अब वे नक्सलियों का साथ नहीं देंगे। मुख्यधारा से जुड़कर ही काम करेंगे। गांव के बच्चों और युवाओं के भविष्य को देखेंगे। वहीं इसी अभियान का परिणाम रहा कि ग्रमीणों ने नक्सलियों को उन्हीं के तरीके में जवाब देने के लिए 14 अगस्त को जगह-जगह बैनर बांध कर उनके खिलाफ खड़े हुए थे।

सड़क और राशन दुकान है ग्रामीणों की पहली प्राथमिकता

सुकमा के SP सुनील शर्मा ने बताया कि इस अभियान का अब अच्छा असर देखने को मिल रहा है। अभियान के शुरुआत होने पर अब इलाके के लोग खुलकर पुलिस के पास आ रहे हैं। साथ ही अपनी समस्या भी बता रहे हैं। अब तक पुलिस के पास जितने भी ग्रामीण पहुंचे हैं, उन्होंने सबसे पहले गांव-गांव तक सड़कों का जाल बिछाने व गांवों में राशन दुकान खोलने की मांग की है। साथ ही ग्रामीण अब नक्सलवाद से आजादी भी चाहते हैं।

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