AutomobileBilaspurBollywoodChhattisgarhDelhiEconomyEntertainmentFinanceGadgetsGaurella pendra marwahiIndiaKorbaMumbaiNew DelhiPoliticsRaipurSportsUncategorizedWorldअम्बिकापुरमुंगेली

बिलासपुर में बच्चों में बढ़ रहा संक्रमण:बच्चे होम आइसोलेशन में, सरकारी अस्पतालों में तैयारी अधूरी; डॉक्टर बोले-पैरेंट्स टेस्ट नहीं करा रहे

नीतेश वर्मा

ब्यूरो हेड

 

बिलासपुर में कोरोना की तीसरी लहर लगातार बच्चों को संक्रमित कर रही है। स्थिति यह है कि 14 दिन के भीतर 300 से अधिक बच्चे कोरोना की चपेट में आ गए हैं। राहत है कि कोरोनावायरस के शिकार ज्यादातर बच्चे घर में ही आइसोलेट हैं और उन्हें अस्पतालों में भर्ती करने की नौबत नहीं आई है। इधर, सरकारी अस्पताल में पिछले एक माह से सिर्फ तैयारियों का दावा किया जा रहा है। अस्पताल में भर्ती करने की नौबत आए तो बच्चों के लिए मात्र 16 वेंटिलेटर बेड है। ऐसे में स्थिति गंभीर हुई तो मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों पर ही भरोसा करना पड़ सकता है।

 

बिना डॉक्टर के सलाह के बच्चों का दवा ना दें
चंद्राकर चिल्ड्रन हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ मनोज चंद्राकर जी बताते हैं कि आजकल ज्यादातर पैरेंट्स बच्चों के एंटीबायोटिक व बुखार की दवाइयां घर में ही रखते हैं और बिना डॉक्टर के सलाह लिए ये दवाइंयां बच्चों को दे देते हैं। यह स्थिति बच्चों के लिए घातक हो सकती है। मौजूदा हालात में बच्चों के बीमार होने पर उसे तत्काल अस्पताल लेकर जांए और जरूरी जांच कराने के बाद डॉक्टर की सलाह पर दवाइंयां बच्चों को खिलाएं।

कोरोना की तीसरी लहर चल रही है और लगातार संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ रही है। चिंता इसलिए है क्योंकि कोरोना का नया वैरिएंट इस बार बच्चों को भी अपनी चपेट में ले रहा है। इस बार संक्रमण परिवार के ज्यादातर सदस्यों को अपना शिकार बना रहा है। ऐसे में घर के एक सदस्य कोरोना पॉजिटिव मिल रहे हैं, तो उनके अन्य सदस्य भी संक्रमित होने लगे हैं। ऐसे में तीसरी लहर बच्चों के लिए घातक हो सकती है। स्वास्थ्य विभाग के साथ ही बच्चों के डॉक्टर इस वैरिएंट को लेकर हैरान व परेशान हैं। यही वजह है कि बच्चों के बीमार होने पर उनका कोरोना जांच कराने की सलाह दी जा रही है।

गंभीर स्थिति के लिए नाकाफी है तैयारी
जनवरी 2022 के शुरुआत में ही लगातार बच्चे संक्रमण के शिकार हो रहे हैं। अब तक संक्रमित बच्चों की संख्या 300 के पार हो गई है। मौजूदा हालात में रोज 25 से 30 बच्चे कोरोना पॉजिटिव मिल रहे हैं। हालांकि, अधिकांश बच्चों का घरों में इलाज चल रहा है और अस्पताल में भर्ती करने की नौबत नहीं आई है। भले ही स्वास्थ्य विभाग के अफसर बच्चों के लिए अस्पताल व बेड की तैयारी करने का दावा कर रहे हैं। लेकिन, उपचार की व्यवस्था अधूरी है।

Advertisement
Advertisement

CIMS (छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस) में 42 बिस्तर बच्चों के लिए रखा गया है। जिसमें मात्र 16 वेंटिलेटर बेड हैं और बाकी ऑक्सीजन बेड हैं। इसी तरह संभागीय कोविड अस्पताल में भी बच्चों को रखने के लिए 42 बिस्तर तैयार किया गया है। जिसमें मात्र 10 वेंटिलेटर हैं। बाकी ऑक्सीजन बेड हैं। आने वाले दिनों में कोरोना का ग्राफ बढ़ा और बच्चों को अस्पताल में भर्ती करने की स्थिति बनी तो हालात बदतर हो सकते हैं।

मात्र 94 बेड का इंतजाम, निजी अस्पतालों का रहेगा सहारा
सरकारी सुविधा नाकाफी इसलिए होगी क्योंकि CIMS और जिला अस्पताल मिलाकर 94 बिस्तर ही बच्चों के लिए बनाया गया है। जो बच्चों के प्रारंभिक संक्रमण दर के हिसाब से अधूरी मानी जा रही है। आने वाले समय में बच्चों का संक्रमण बढ़ा और अस्पताल में भर्ती करने की स्थिति बनी, तो लोगों को सरकारी व्यवस्था छोड़ प्राइवेट अस्पताल जाना पड़ सकता है।

CMHO बोले-सरकारी व निजी अस्पतालों को किया गया है अलर्ट
CMHO डॉ. प्रमोद महाजन का कहना है कि कोरोना के नए वैरिएंट को लेकर अलर्ट जारी किया है। जिले के 37 निजी अस्पतालों में 153 बिस्तरों की व्यवस्था की गई है। सरकारी अस्पतालों में 1667 बिस्तर भी व्यवस्था किया गया है। बच्चों के लिए सभी अस्पतालों में वार्ड बनाने के लिए कहा गया है।

25 प्रतिशत बच्चे हैं संक्रमण के शिकार, पैरेंट्स टेस्ट नहीं करा रहे
बच्चों के डॉक्टर के W देवरस बताते हैं कि बढ़ते कोरोना संक्रमण और मौसम के बदलते मिजाज ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। रोजाना सर्दी, खासी और बुखार से पीड़ित बच्चे बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंच रहे हैं। स्थिति यह है कि वर्तमान में 25 फीसदी बच्चे कोरोना संक्रमण के शिकार हैं। हालांकि, संक्रमित बच्चों के पैरेंट्स टेस्टिंग कराने के लिए रूचि नहीं ले रहे हैं। क्लीनिक में आने वाले 25-30 बच्चों में कोरोना के लक्षण मिल रहे हैं। लेकिन, सलाह के बाद भी 5 फीसदी पैरेंट्स ही टेस्ट करा रहे हैं। उन्होंने कोरोना के लक्षण वाले अधिक से अधिक बच्चों की जांच कराने की सलाह दी है।

Related Articles

Back to top button
Close
Close