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नवरात्रि स्पेशल : धनपुर में पांडवों के द्वारा खोदा गया था 365 तालाब

धनपुर में पांडवों के द्वारा खोदा गया था 365 तालाब

गौरेला पेंड्रा मरवाही 5 अक्टूबर 2021 पेंड्रा श्री आदिशक्ति दुर्गा देवी के नाम से विख्यात पौराणिक ग्राम धनपुर के तालाबों के लिए भी विख्यात है। मान्यता है कि अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने यहां 365 तालाब खोदे। उनमें से बहुत से किसानों द्वारा खेत बना लिए गए हैं इसके बावजूद लगभग डेढ़ सौ तालाब आज भी धनपुर में स्थित हैं जिनमें से एक तालाब पेंड्रा धनपुर मुख्य मार्ग पर धनपुर से 1 किलोमीटर पहले बाएं और स्थित है। इस तालाब का नाम भंवतरा तालाब है। यहां के बुजुर्ग धनपुर के तालाबों की कहानियां बताते हुए भंवतरा तालाब के बारे में बताते है उनके अनुसार उत्तर से दक्षिण को जोड़ने वाला यह प्राचीनतम मार्ग है जो गंगोत्री से सेतबंध रामेश्वरम को जोड़ता है । पुराने समय में पैदल यात्री इसी मार्ग से गंगोत्री से गंगाजल लेकर सेतुबंध रामेश्वरम जाते थे। इसी मार्ग से पशु व्यापारी निकलते थे व्यापार भी बैलगाड़ी से और पशुओं के माध्यम से होता था। तथा यह सुगम मार्ग था। मार्ग से निकलने वाले पदयात्रियों को यह तालाब भंवतरा खाना बनाने के लिए बर्तन इत्यादि देता था। यात्री भोजन बनाने खाने के बाद बर्तन तालाब को फिर से लौटा देते थे और या निरंतर चलता रहा परंतु किसी व्यक्ति के द्वारा बर्तन उपयोग करने के बाद ले जाने की कोशिश की गई जिसके बाद तालाब ने बर्तन देना बंद कर दिया। इस बात में कितनी सच्चाई है इसका कोई प्रमाण मेरे पास तो नहीं है परंतु ग्रामीण मान्यता यही है।

 

छत्तीसगढ़ के गांव गांव में प्राचीन से प्राचीन तालाब है तथा हर गांव में तालाबों के पीछे कुछ ना कुछ कहानियां है जो लोकमानस में प्रचलित है ऐसे में कोई कारण नहीं है कि भंवतरा तालाब धनपुर की इस किदवंती को नकार दिया जाए। भंवतरा तालाब काफी बड़ा तालाब है तथा यह एक बांध जैसा दिखाई देता है जिसमें अन्य तालाबों को भी मिला दिया गया है परंतु पानी भंवतरा में ही रहता है। भंवतरा तालाब का जितना बड़ा रकबा है उसका यदि सिंचाई के रूप में उपयोग करना है तो इसमें नहर के माध्यम से बगड़ी बांध का पानी लकर भरा जा सकता है जो भंवतरा बांध अभी खाली पड़ा है उसे किसानों के लिए उपयोगी बनाया जा सकता है ।वही इस बांध के जलभराव से धनपुर की खूबसूरती में चार चांद लग जाएंगे ।

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