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क्या प्रदेश की राजनीति में कुछ बड़ा होने वाला है? ढाई -ढाई साल पर पर अचानक सन्नटा क्यो?क्या तूफान से पहले वाली शांति,पढ़िए प्रदेश की राजनीति पर सबसे सटीक विश्लेषण राजीव चौबे की कलम से

क्या प्रदेश की राजनीति में कुछ बड़ा होने वाला है? ढाई -ढाई साल पर पर अचानक सन्नटा क्यो?क्या तूफान से पहले वाली शांति,पढ़िए प्रदेश की राजनीति पर सबसे सटीक विश्लेषण राजीव चौबे की कलम से

दिल्ली,रायपुर-छत्तीसगढ़ की राजनीति पर इस समय देश की नजर है, यू तो छत्तीसगढ़ राजनीतिक दृष्टि से शांत राज्य माना जाता रहा है,मध्यप्रदेश से अलग होने के बाद अजित जोगी प्रथम मुख्यमंत्री बने तो लगा ये सरकार लम्बी चलेगी पर जनता ने जोगी सरकार को नकार दिया ।

उस समय बीजेपी की तरफ से दिलीप सिंह जूदेव मुख्यमंत्री की रेस में सबसे आगे थे पर एक सीडी कांड ने रमन सिंह का किस्मत का दरवाजा ऐसा खोला की 15 साल इस प्रदेश में राज रहा, और रमन सिंह लोकप्रिय मुख्यमंत्री के रूप में अपनी पहचान स्थापित करने में सफल रहे ।

दूसरी ओर कांग्रेस लगातार आपसी फूट में ही कमजोर हो रही थी ।कांग्रेस के लिए झीरम घाटी हत्याकांड किसी बुरे सपने से कम नही था ।ऐसे दौर में जब विद्याचरण शुक्ला,नंदकुमार पटेल,महेंद्र कर्मा जैसे कद्दावर नेता नक्सलियों द्वारा मार दिए गए तब कांग्रेस नेत्रवित्व ने भूपेश बघेल को प्रदेश को कांग्रेस का कमान सौपा ।और भूपेश बघेल ने अपने आक्रामक अंदाज और मुश्किल फैशले लेकर प्रदेश कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जान फूंक दी । उनकी नीति का ही परिणाम था कि कांग्रेस सत्ता में वापसी कर पाई ।साथ टीएस का विनम्र छवि को जनता के दिल मे जगह बना ली


अब मुख्य समस्या मुख्यमंत्री को लेकर थी एक तरफ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष तो दूसरी ओर नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव जिन्होंने घोषणा पत्र बनाने का कार्य किया था । ये बात कभी सामने निकल कर नही आई कि बन्द कमरे में राहुल गांधी से क्या बात हुई थी
पर जो बात बीच बीच मे निकल के आती रही उसके अनुसार ढाई-ढाई साल का फार्मूला बना था ।जिसकी मियाद 17 जून को थी । अब राजनीतिक रस्साकशी का खेल यही से चालू होता है
सूत्रों के द्वारा और कई मीडिया संस्थान के सूत्रों से खबर झनकर बाहर आई कि राहुल गांधी टीएस सिंहदेव के नाम पर मुहर लगा दिए है फिर अचानक मुख्यमंत्री का दिल्ली पहुचना और 50 से अधिक विधायकों और प्रदेश के बड़े नेताओं का दिल्ली कूच प्रदेश के साथ देश की राजनीति को गरमा दिया । मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी को प्रदेश आने का न्योता दिया जिसको उन्होंने स्वीकार किया पर अभी तक वो कब आएंगे इसको लेकर संशय बरकार है ।
मौजूदा मुख्यमंत्री को हटा कर दूसरे को मुख्यमंत्री बनाना किसी भी शीर्ष नेत्रवित्व के लिए आसान नही होता जब तक कोई खामी या गलती या आरोप मौजूदा मुख्यमंत्री पर न हो ।मुख्यमंत्री खेमा अपनी ओर से आश्वस्त है कि कोई बदलाव नही होगा ।
दूसरी ओर टीएस सिंहदेव का खेमा दबी जुबान से बदलाव की बात पर आश्वस्त है ।
प्रदेश प्रभारी पुनिया ,वेणुगोपाल लगातार प्रदेश की राजनीति में नजर बनाए हुए है ।राजनीतिक पंडितो के अनुसार ये मामला कुछ समझौता के साथ समाप्त हो जाएगा क्योंकि कांग्रेस मुख्यमंत्री बदलने का रिश्क ले इसकी उम्मीद बेहद कम है ।
फिर भी क्रिकेट और राजनीति को अनिश्चिताओं का खेल कहा जाता है । 12 से 16 सितम्बर में कुछ बड़ा होने की उम्मीद जताई जा रही है । दोनो पक्ष शीर्ष नेत्रवित्व को अपनी बात रख देने की बात कह रहा अब जो फैसला लेना है शीर्ष नेत्रवित्व ही लेगे

बरहाल प्रदेश की राजनीति देश मे सुर्खियों  ।बटोर रही है ।

ये लेख लेखक के निजी विचार है
आप सहमत असहमत हो सकते है ।
राजीव चौबे

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