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ऑनलाइन शिक्षा: वरदान या अभिशाप??? शिक्षा माफियाओं का फलता फूलता कारोबार

ऑनलाइन शिक्षा की क्या है उपयोगिता??क्या बच्चो के जीवन पर पड़ता है नकरात्मक प्रभाव

Education : कोरोना महामारी से भयभीत तमाम शिक्षा संचालकों और शिक्षा के ठेकेदारों ने खासकर बच्चों की पढ़ाई के लिए तोड़ निकाल ऑनलाइन शिक्षा देने की जो कोशिशें की हैं, वो बहुत जल्द बेहद घातक लगने लगीं। लगता है कि जानकारों ने जानते हुए भी जो पहल की उसके तमाम बुरे नतीजों ने इसे कटघरे में ला खड़ा किया।

जहां पहले से ही बच्चों में मोबाइल फोन के दुष्परिणाम और खतरनाक नतीजों ने मां-बाप और अभिभावकों की परेशानी बढ़ा रखी थी, वहीं एकाएक खासकर उन्हीं को मोबाइल के जरिए शिक्षा परोस देना कोरोना महामारी से जूझ रही दुनिया के लिए एक दूसरे अभिशाप से कम नहीं है।

बच्चों को अव्वल बनाने की होड़ में पहले जहां अभिभावक चुप रहे वहीं अब सरकारी महकमों पर भी सवाल उठने लगे कि ब्यूरोक्रेट्स सब कुछ जानते हुए भी न केवल गूंगे बने रहे बल्कि जनप्रतिनिधियों तक ने चुप्पी साध ली।हालांकि बच्चों की ऑनलाइन शिक्षा पर सवाल पहले दिन से ही उठ रहे हैं। लेकिन हैरानी की बात है कि खुद सीबीएई और तमाम राज्यों के बोर्ड ने भी बिना देरी किए न केवल ऑनलाइन शिक्षा शुरू करवाई बल्कि खूब प्रचार, प्रसार भी किया।

अभिभावकों के सामने दूसरे बच्चों से पिछड़ने का भय भी पैदा हुआ या किया गया और स्कूलों द्वारा ऑनलाइन शिक्षा की थाली सजाकर वाट्सएप ग्रुप के रूप में परोसी जाने लगी।

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